कूलेंट फ़िल्टर क्या करता है?

कूलेंट फ़िल्टर मशीन में घूमते कूलेंट से गंदगी निकालता है। कूलेंट साफ़ होकर कटिंग वाली जगह पर लौटता है, ताकि अपना काम कर सके।

कूलेंट क्या करता है?

मशीन जब काटती या ग्राइंड करती है, तब कूलेंट टूल और जॉब पर छिड़का जाता है। यह तीन काम करता है:

  • कटिंग वाली जगह से गर्मी बहा ले जाता है।
  • कटते समय टूल को लुब्रिकेट करता है।
  • काम की जगह से चिप और बुरादा धो देता है।

इसके बाद कूलेंट टैंक में लौट जाता है, जिसे अक्सर सम्प कहते हैं। पंप उसे फिर घुमा देता है। एक ही कूलेंट महीनों घूम सकता है।

कूलेंट में क्या-क्या मिल जाता है?

मशीन से हर बार गुज़रने पर गंदगी जुड़ती है:

  • ग्राइंडिंग, होनिंग और कटिंग से निकले मेटल के बारीक कण
  • छोटे चिप जो चिप कन्वेयर से छूट जाते हैं
  • मशीन की अपनी घिसाई के कण
  • गाद, जो बारीक मेटल, बिगड़े कूलेंट और गंदगी का मिश्रण होती है
  • स्लाइडवे और हाइड्रोलिक सिस्टम से रिसने वाला ट्रैम्प ऑयल

स्टील या कास्ट आयरन पर काम करने वाली मशीनों में ज़्यादातर ठोस गंदगी फ़ेरस होती है। उसका बड़ा हिस्सा बहुत बारीक होता है।

कूलेंट गंदा हो तो क्या होता है?

कूलेंट की गंदगी अगली बार फिर कटिंग वाली जगह पर पहुँचती है। वहाँ वह नुकसान करती है:

  • कण पार्ट की सतह पर खरोंच डालते हैं और फ़िनिश बिगाड़ते हैं।
  • पार्ट टॉलरेंस से बाहर जा सकते हैं और ज़्यादा पार्ट रिजेक्ट होते हैं।
  • टूल और ग्राइंडिंग व्हील जल्दी घिसते हैं।
  • नोज़ल और कूलेंट की छोटी लाइनें जाम हो जाती हैं।
  • पंप, सील और स्लाइडवे घिसते हैं।
  • सम्प में गाद जमती है और उसमें बैक्टीरिया पनपते हैं। कूलेंट से बदबू आने लगती है और वह जल्दी ख़राब हो जाता है।

गंदा कूलेंट ठंडा भी कम करता है। टूल ज़्यादा गर्म चलता है और जल्दी घिसता है।

फ़िल्टर से क्या बदलता है?

कूलेंट फ़िल्टर कूलेंट के मशीन में लौटने से पहले गंदगी निकाल देता है। नतीजे सीधे हैं:

  • पार्ट की फ़िनिश बेहतर और एकसमान होती है।
  • कम पार्ट रिजेक्ट होते हैं।
  • टूल और व्हील ज़्यादा चलते हैं।
  • मशीन में ब्रेकडाउन और मरम्मत कम होती है।
  • कूलेंट ज़्यादा चलता है, इसलिए कम बार बदलना पड़ता है और कम फेंकना पड़ता है।

साफ़ कूलेंट बराबर रफ़्तार से बहता है और उसका तापमान भी स्थिर रहता है। इससे ग्राइंडिंग और डीप होल ड्रिलिंग जैसे क्लोज़ टॉलरेंस के काम में मदद मिलती है।

कौन-सा फ़िल्टर?

कूलेंट फ़िल्टर कई तरह के होते हैं। बैग, पेपर और कार्ट्रिज फ़िल्टर अपने छेदों से बड़े कण रोकते हैं। सेंट्रीफ़्यूज गंदगी को घुमाकर बाहर फेंकते हैं। मैग्नेटिक फ़िल्टर बहाव से लोहा और स्टील खींच लेते हैं। CNC मशीनों के लिए फ़िल्ट्रेशन के प्रकार गाइड में हर एक को समझाया गया है।

स्टील या कास्ट आयरन पर काम करने वाली मशीनों में मैग्नेटिक फ़िल्टर पहली स्टेज के रूप में अच्छा रहता है। यह बहुत बारीक फ़ेरस कण पकड़ता है, जाम नहीं होता और इसमें बदलने के लिए कोई फ़िल्टर एलिमेंट नहीं होता। जहाँ एल्युमिनियम, पीतल या दूसरी नॉन-मैग्नेटिक गंदगी भी हो, वहाँ मैग्नेट के बाद लगा बैरियर फ़िल्टर बाक़ी पकड़ लेता है। आमने-सामने तुलना के लिए मैग्नेटिक फ़िल्टर और दूसरे फ़िल्टर की तुलना देखें।.

सही सिस्टम कण के साइज़, कूलेंट के प्रकार, फ़्लो रेट और मशीन के काम की मात्रा पर निर्भर करता है।

कूलेंट फ़िल्टर कहाँ इस्तेमाल होते हैं?

  • ग्राइंडिंग। ग्राइंडिंग से स्टील के बहुत बारीक कण बनते हैं। ख़राब फ़िनिश का यही मुख्य कारण है।
  • बेयरिंग और प्रिसिशन पार्ट बनाना। कसी टॉलरेंस के लिए हर पास में साफ़ कूलेंट चाहिए।
  • मशीनिंग सेंटर और लेथ। बारीक बुरादा नोज़ल जाम करता है और पंप घिसता है।
  • होनिंग और लैपिंग। फ़िनिश इस पर निर्भर करती है कि कूलेंट या ऑयल साफ़ हो।
  • वायर कट मशीनें। बराबर कट के लिए फ़्लूइड साफ़ रहना चाहिए।
  • पार्ट वॉशर। वॉश लिक्विड में मौजूद लोहा अगली खेप के पार्ट पर वापस बैठ जाता है।

SMAG रेंज

Santosh Magnetic Works मैग्नेटिक कूलेंट फ़िल्टर पानी वाले कूलेंट, नीट ऑयल, हाइड्रोलिक ऑयल और वॉश सॉल्यूशन के लिए बनाता है। हर यूनिट मुंबई में ऑर्डर पर कनेक्शन साइज़ और फ़्लो रेट के हिसाब से बनती है। फ़िल्ट्रेशन रेंज देखें, या मशीन, फ़्लूइड और फ़्लो रेट बताकर संपर्क करें।