मैग्नेटिक कूलेंट फ़िल्टर
कूलेंट, ऑयल और वॉश लिक्विड के लिए मैग्नेटिक फ़िल्टर, ऑर्डर पर बनाया जाता है
मशीन कूलेंट की उम्र घटती जाती है। ट्रैम्प ऑयल, बैक्टीरिया, मेटल के बारीक कण और गलत मिक्सिंग, ये सब उसकी उम्र कम करते हैं। इनमें से ज़्यादातर को अच्छी आदतों से क़ाबू में रखा जा सकता है। शुरुआत इससे करें कि गंदगी कूलेंट में न जाए।
ट्रैम्प ऑयल वह ऑयल है जो मशीन से रिसकर कूलेंट में मिल जाता है। यह स्लाइडवे, गियरबॉक्स और हाइड्रोलिक सिस्टम से आता है। यह सम्प में कूलेंट के ऊपर तैरता रहता है।
ट्रैम्प ऑयल की परत कूलेंट तक हवा नहीं पहुँचने देती। उसके नीचे बैक्टीरिया पनपते हैं और कूलेंट से बदबू आने लगती है। ट्रैम्प ऑयल पार्ट पर दाग भी छोड़ता है और कूलिंग घटाता है।
इसे डिस्क या बेल्ट स्किमर से, या कोएलेसिंग सेपरेटर से हटाएँ। जिन लीकेज से यह अंदर आता है, उन्हें ठीक करें।
कटिंग और ग्राइंडिंग से निकला बारीक मेटल कूलेंट में रह जाता है और मशीन में बार-बार घूमता रहता है। यह पार्ट पर खरोंच डालता है, टूल और पंप को घिसता है, और सम्प में गाद बन जाता है।
जो मेटल आप काटते हैं, उसके हिसाब से फ़िल्टर चुनें:
मिले-जुले काम में दोनों लगाएँ। मैग्नेटिक फ़िल्टर पहले रखें। वह लोहा निकाल देता है, इसलिए उसके बाद लगा बैरियर फ़िल्टर धीरे भरता है और ज़्यादा चलता है। मैग्नेटिक फ़िल्टर और दूसरे फ़िल्टर की तुलना में यह फ़र्क़ विस्तार से समझाया गया है।
मैग्नेटिक रॉड ज़्यादा भर जाने से पहले साफ़ कर लें।
कूलेंट एक कंसंट्रेट होता है जिसे पानी में मिलाया जाता है। मिक्सिंग सही होनी चाहिए।
कंसंट्रेशन हफ़्ते में एक बार रिफ़्रैक्टोमीटर से जाँचें। मिक्सिंग उस लेवल पर रखें जो कूलेंट बनाने वाली कंपनी बताती है।
कूलेंट भाप बनकर उड़ता है और पानी पहले उड़ता है। टॉप-अप के लिए पहले से सही स्ट्रेंथ में मिला हुआ कूलेंट डालें। नल का सादा पानी कंसंट्रेशन घटाता है और बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है।
ज़्यादा मिनरल वाला पानी मशीन में जमाव छोड़ता है। रिवर्स ऑस्मोसिस या डीआयनाइज़्ड पानी से यह नहीं होता।
मिक्सिंग करते समय कंसंट्रेट हमेशा पानी में डालें। दो अलग-अलग कूलेंट कभी न मिलाएँ। वे आपस में रिएक्ट करके कूलेंट को अस्थिर बना सकते हैं।
बुरादा, चिप और गाद सम्प में बैठ जाते हैं। उनमें बैक्टीरिया पनपते हैं और गाद पंप को जाम कर सकती है।
बंद पड़ी मशीन में एक जगह ठहरा कूलेंट जल्दी ख़राब होता है। फ़्लो और हवा न हो तो बैक्टीरिया बढ़ते हैं। मशीन लंबे समय तक बंद रहे तो रोज़ कुछ देर पंप चलाएँ या एयरेशन का इस्तेमाल करें।
बदबू का मतलब है कि बैक्टीरिया पनप रहे हैं। इसे रोकने के लिए:
अच्छी आदतें हों तो कूलेंट की एक फ़िलिंग कई महीने चल सकती है। वरना कुछ हफ़्तों में ही बदलना पड़ सकता है। उम्र मशीन, कटने वाले मेटल और मशीन के चलने के घंटों पर भी निर्भर करती है।
बदलने का समय आ गया है, इसके ये संकेत देखें:
Santosh Magnetic Works मैग्नेटिक कूलेंट फ़िल्टर मुंबई में ऑर्डर पर बनाता है। यह कूलेंट, ऑयल और वॉश लिक्विड से बारीक लोहा निकालता है, और रॉड को बाहर निकालकर पोंछने से साफ़ हो जाता है। फ़िल्ट्रेशन रेंज देखें, या अपनी मशीन और फ़्लो रेट बताकर संपर्क करें।